



जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकि टाईगर रिजर्व (वीटीआर) से एक बार फिर वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी सामने आई है। वाल्मीकि टाईगर रिजर्व वीटीआर के जंगलों में बाघों की गिनती के लिए ट्रैप कैमरे में बाघो के वृद्धि के संकेत मिले हैं। एक बार फिर कुशल प्रबंधन और ग्रास लैंड एरिया बढ़ाने के बाद वाल्मीकि टाईगर रिजर्व जंगल में बढ़ते बाघों की संख्या से नए कृतिमान स्थापित करने की ओर अग्रसर है। बताते चलें कि वाल्मिकी टाइगर रिजर्व बिहार के एकमात्र इकलौता टाइगर रिजर्व है। जहां हर साल हजारों की संख्या में सैलानी जंगल सफारी करने के लिए आते हैं। जानकारो की माने तो ग्रासलैंड बढ़ने से शाकाहारी जानवरों की संख्या बढ़ी तो बाघों को आसानी से शिकार मिलने लगा। इसी कारण से यहां बाघों की संख्या बढ़ी है। वीटीआर के जंगलों में बेहतर प्रबंधन व सुरक्षा-संरक्षा के कारण बाघों की संख्या बढ़ी है।
सात फीसदी हुआ वीटीआर में ग्रासलैंड का दायरा
890 वर्ग किलोमीटर में वीटीआर का जंगल फैला हुआ है। इसमें 24 सौ हेक्टेयर में अब तक ग्रासलैंड तैयार किया जा चुका है। यह जंगल क्षेत्रफल का सात फीसदी बताया जा रहा है। ऐसा करने से शाकाहारी जानवरों के लिए भोजन आसानी से उपलब्ध हो रहा है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में लगातार बाघों की संख्या बढ़ने से एक ओर वन प्रशासन काफी उत्साहित है, वहीं जो पर्यटक जंगल सफारी का आनंद लेने आते हैं उन्हें भी बाघों का दीदार आसानी से हो जा रहा है।
सफारी में आसानी से दिखेंगे बाघ
ऐसे में अब बाघों की संख्या में इजाफा होने के बाद पर्यटकों को और आसानी से बाघ नजर आ सकेंगे।
लिहाजा बाघों की संख्या बढ़ने पर पर्यटक भी फूले नही समा रहे हैं। दरअसल वाल्मीकि टाइगर रिजर्व अपने जैव विविधताओं के लिए प्रसिद्ध तो है ही यहां की प्राकृतिक सुंदरता भी सबको अपने तरफ आकर्षित करती है।
35 प्रतिशत बढ़ी शाकाहारी जानवरों की संख्या
लगातार कैमरों में कैद हो रही तस्वीरों के अनुसार, वीटीआर में शाकाहारी पशुओं की संख्या में भी इजाफा हुआ है। वीटीआर प्रशासन के मुताबिक प्रत्येक बाघ के लिए नंबर निर्धारित है। इसमें यदि बिना नंबर का कोई शावक कैमरा के सामने आता है तो यह साबित होता है कि नए बाघ दिख रहे हैं। इस आधार पर संख्या का पता लगाया जाता है। वीटीआर में वर्ष 2006 से बाघों की गणना हो रही है।
एनटीसीए को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
ट्रैप कैमरा से प्राप्त तस्वीर से इनकी संख्या का निश्चित अनुमान टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा गणना कर लगाया जाएगा और इसकी रिपोर्ट एनटीसीए को सौंपी जाएगी।
देहरादून लैब में की जाती पहचान
ट्रैप कैमरे में एक बाघ की कई तस्वीर क्लिक होकर कैद हो जाती है। जिन तस्वीरों को अलग करने के लिए देहरादून के लैब भेजा जाता है। जहां इन तस्वीरों में जो एक बाघ की तस्वीर होती है। उनको आसानी से विशेषज्ञ अलग कर देते हैं। फिर यही उनकी एक निश्चित संख्या ज्ञात हो पाती है। बताते चलें कि वीटीआर में बाघो की गणना दो बार होती है। एक चार साल में एक बार होती है, जिसे मुख्य गणना कही जाती है। वहीं सामान्य गणना साल में एक बार होती है। यह टाइगर रिजर्व की नियमित प्रक्रिया है। गणना के पहले ट्रैल लाइन पर बाघों के पंजों के निशान आदि देखे जाते हैं। इसके बाद ट्रांजिट लाइन में वन कर्मी चलकर गणना करता है। जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है, उसके बाद ट्रैप कैमरे से गणना की जाती है। यह बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है।









