कोचिंग और निजी ट्यूशन पढ़ाने वाले शिक्षकों पर होगी सख्त कार्रवाई, शिक्षा विभाग का बड़ा निर्देश।

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सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को दी चेतावनी, आचार संहिता उल्लंघन पर होगा अनुशासनिक दंड

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:-बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि कोई भी शिक्षक विद्यालय परिसर अथवा अन्य स्थानों पर संचालित कोचिंग, निजी ट्यूशन या व्यवसायिक शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने का कार्य नहीं करेगा। विभाग ने इस आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सज्जन आर. द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य के प्रारंभिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। वर्तमान में अधिकांश विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध हैं। ऐसे में शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी अपने विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। शिक्षा विभाग का मानना है कि सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों द्वारा निजी कोचिंग और ट्यूशन में समय देने से विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित होती है। इससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति और शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ता है। विभाग ने यह भी उल्लेख किया है कि शिक्षकों की शैक्षणिक क्षमता को बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि वे विद्यालयों में प्रभावी शिक्षण कार्य कर सकें। जारी निर्देश में कहा गया है कि यदि कोई शिक्षक विद्यालय परिसर या अन्य किसी स्थान पर कोचिंग, निजी ट्यूशन अथवा व्यवसायिक शिक्षण संस्थानों में पढ़ाते हुए पाया जाता है, तो इसे शिक्षकों के लिए निर्धारित आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित शिक्षक के विरुद्ध कठोर अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग के इस आदेश को सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभाग ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निगरानी बढ़ाने तथा आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है, ताकि सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को बेहतर और नियमित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

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