वेतन संकट से फूटा वनकर्मियों का आक्रोश, रधिया वन प्रक्षेत्र में शुरू हुआ धरना।

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पांच माह से भुगतान नहीं मिलने का आरोप, 24 घंटे ड्यूटी के निर्देश के खिलाफ लामबंद हुए दैनिक वेतनभोगी कर्मी।

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के रधिया वन प्रक्षेत्र में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मियों का लंबे समय से चला आ रहा असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। लंबित वेतन भुगतान और कार्य अवधि निर्धारित करने की मांग को लेकर कर्मियों ने प्रक्षेत्र कार्यालय परिसर में धरना शुरू कर दिया है। कर्मियों का आरोप है कि जनवरी 2026 से अब तक उन्हें वेतन का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। धरने पर बैठे कर्मियों में टीटी, पीटी, एपीसी कर्मी, नाका गार्ड और वायरलेस ऑपरेटर शामिल हैं। वन क्षेत्र पदाधिकारी को सौंपे गए आवेदन में उन्होंने कहा है कि पिछले पांच महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके परिवारों का भरण-पोषण प्रभावित हो रहा है। कई कर्मियों को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज और उधार का सहारा लेना पड़ रहा है। उनका कहना है कि समय पर वेतन नहीं मिलने से बच्चों की पढ़ाई, इलाज और घरेलू खर्चों का प्रबंधन कठिन हो गया है। कर्मियों ने कार्य अवधि को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि वर्तमान में वे प्रतिदिन आठ घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन उन पर 24 घंटे कार्य करने का दबाव बनाया जा रहा है। आरोप है कि ऐसा नहीं करने पर अनुपस्थित दर्ज करने तथा एपीसी केंद्रों में ताला लगाने की चेतावनी दी गई है। इस निर्देश से कर्मियों में नाराजगी और असंतोष बढ़ गया है। आंदोलन को प्रभावी बनाने के लिए कर्मियों ने अपने-अपने एपीसी कैंपों से जीपीएस मोबाइल और वायरलेस हैंडसेट प्रक्षेत्र कार्यालय में जमा कर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक लंबित वेतन का भुगतान नहीं किया जाता और ड्यूटी अवधि को लेकर स्पष्ट आदेश जारी नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस बाबत संघ के अध्यक्ष अजय राम ने बताया कि धरनारत कर्मियों ने निर्णय लिया है कि वे प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक प्रक्षेत्र कार्यालय में उपस्थित रहेंगे और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठाएंगे। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि आंदोलन के दौरान यदि वन क्षेत्र या वन्यजीवों से संबंधित कोई अप्रिय घटना घटती है तो उसकी जिम्मेदारी आंदोलनरत कर्मियों की नहीं होगी। वनकर्मियों के इस आंदोलन ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और कर्मियों की समस्याओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें विभागीय अधिकारियों की प्रतिक्रिया और मांगों के समाधान पर टिकी हुई हैं। यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

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