आंधी और मूसलाधार बारिश ने मचाई तबाही,

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घर पर गिरा विशाल पेड़, बाल-बाल बचा परिवार, कई कमरे हुए ध्वस्त, भारी बारिश से जंगल सफारी भी हुई बंद।

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- इंडो-नेपाल सीमा से सटे वाल्मीकिनगर क्षेत्र में बुधवार की देर शाम आई तेज आंधी और इस सीजन की पहली मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। जहां एक ओर लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर कई स्थानों पर नुकसान की खबरें सामने आई हैं। गंडक बराज के समीप स्थित टीना शेड कॉलोनी में एक विशालकाय कर्मा का पेड़ एक मकान पर गिर गया, जिससे दो परिवारों का आशियाना बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मकान मालिक मुन्ना चौबे ने बताया कि आंधी और बारिश की तीव्रता देखकर उन्हें पहले ही अंदेशा हो गया था कि घर के समीप स्थित विशाल पेड़ गिर सकता है। संभावित खतरे को देखते हुए परिवार के सभी सदस्य पड़ोसी के घर चले गए। उन्होंने बताया कि घर छोड़ने के लगभग 15 से 20 मिनट बाद ही विशाल पेड़ उनके मकान पर आ गिरा। इस हादसे में उनके तीन कमरे पूरी तरह ध्वस्त हो गए, जबकि पड़ोसी आनंद पांडेय के दो कमरों को भी भारी नुकसान पहुंचा। स्थानीय लोगों के अनुसार यह पेड़ काफी पुराना था और तेज आंधी में इसके गिरने की आशंका पहले से ही जताई जा रही थी। समय रहते परिवार के लोगों के घर से बाहर निकल जाने के कारण बड़ा हादसा टल गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उस समय परिवार के सदस्य घर के भीतर मौजूद होते तो गंभीर जनहानि हो सकती थी। फिलहाल दोनों परिवार पड़ोसियों और परिचितों के यहां शरण लेकर दिन गुजार रहे हैं।

बारिश से जंगल सफारी पर लगा ब्रेक

बुधवार शाम से शुरू हुई बारिश का असर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के पर्यटन गतिविधियों पर भी देखने को मिला। नेपाल की तराई क्षेत्र में हुई भारी वर्षा के कारण वन मार्गों पर जलजमाव और फिसलन की स्थिति उत्पन्न हो गई। सुरक्षा कारणों से गुरुवार सुबह जंगल सफारी का संचालन स्थगित कर दिया गया। इससे दूर-दराज से वाल्मीकिनगर पहुंचे कई पर्यटकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। मार्गों के निरीक्षण के बाद होगा निर्णय वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार लगातार बारिश के चलते जंगल के कई मार्गों की स्थिति प्रभावित हुई है। रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि सफारी मार्गों का विस्तृत निरीक्षण कराया जा रहा है। नेचर गाइडों और सफारी चालकों द्वारा किए गए प्रारंभिक निरीक्षण में कई स्थानों पर फिसलन और जलजमाव की स्थिति पाई गई है। उन्होंने कहा कि मार्ग पूरी तरह सुरक्षित पाए जाने के बाद ही जंगल सफारी के पुनः संचालन पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल पर्यटकों और कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।

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