वन्यजीवों के लिए ‘चलता-फिरता अस्पताल’ बना नया रेस्क्यू वाहन।

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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व को मिली अत्याधुनिक सौगात, घायल और संकटग्रस्त वन्यजीवों के बचाव कार्य को मिलेगी नई रफ्तार।

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- जैव विविधता, प्राकृतिक संपदा और बाघों की बढ़ती संख्या के लिए देशभर में पहचान बना चुके वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में वन्यजीव संरक्षण को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। वन विभाग ने अपने रेस्क्यू बेड़े में एक अत्याधुनिक रेस्क्यू वाहन शामिल किया है, जो वन्यजीवों के लिए चलते-फिरते अस्पताल की तरह कार्य करेगा। इस नई सुविधा से घायल, बीमार अथवा भटके हुए वन्यजीवों के बचाव और उपचार कार्य में उल्लेखनीय सुधार आने की उम्मीद है।
वीटीआर के घने जंगलों और उससे सटी मानव बस्तियों में समय-समय पर वन्यजीवों के भटकने, घायल होने या अन्य संकटों में फंसने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे मामलों में वन विभाग की रेस्क्यू टीम को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ती है। अब तक बड़े वन्यजीवों के रेस्क्यू के लिए विशेष व्यवस्था मौजूद थी, लेकिन छोटे और मध्यम आकार के वन्यजीवों के सुरक्षित परिवहन एवं उपचार के लिए आधुनिक संसाधनों की कमी महसूस की जा रही थी। नए वाहन के शामिल होने से इस चुनौती का समाधान हो सकेगा। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह विशेष रेस्क्यू वाहन वन्यजीवों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। वाहन में मजबूत और सुरक्षित पिंजरों की व्यवस्था की गई है, जिससे घायल या भयभीत जानवरों को सुरक्षित तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सके। साथ ही इसमें प्राथमिक उपचार के लिए आवश्यक चिकित्सा उपकरण भी उपलब्ध हैं, जिससे घटनास्थल पर ही वन्यजीवों को तत्काल चिकित्सकीय सहायता दी जा सकेगी। वाहन में रेस्क्यू अभियानों के दौरान उपयोग होने वाले जाल, बेहोश करने वाली गन, सुरक्षा उपकरण और अन्य जरूरी संसाधनों को व्यवस्थित रखने के लिए अलग-अलग विशेष खंड बनाए गए हैं। इससे रेस्क्यू टीम को किसी भी आपात स्थिति में तेजी और दक्षता के साथ कार्य करने में मदद मिलेगी। वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार का मानना है कि यह आधुनिक वाहन मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। किसी भी सूचना पर रेस्क्यू टीम अब पहले से अधिक शीघ्रता से घटनास्थल तक पहुंच सकेगी और संकटग्रस्त वन्यजीवों को सुरक्षित बचाकर उनका उपचार कर सकेगी। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में यह नई पहल वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की आधुनिक और संवेदनशील प्रबंधन व्यवस्था को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वन्यजीवों की सुरक्षा, उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था और अधिक सशक्त होगी तथा संरक्षण प्रयासों को नई दिशा मिलेगी।

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