

चितवन (नेपाल) से आधा दर्जन हाथियों के आने की आशंका, प्रशिक्षित चारों हाथियों को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया।
जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर : बिहार के पश्चिमी चंपारण स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में नेपाल से भटककर आए जंगली हाथियों की आहट ने वन विभाग और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से करीब आधा दर्जन हाथियों के वीटीआर क्षेत्र में प्रवेश करने की आशंका जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार बीती रात कालेश्वर स्थित हाथीशाला के आसपास एक जंगली हाथी को देखा गया। इस दौरान जंगली हाथी द्वारा हाथीशाला की जाली क्षतिग्रस्त किए जाने की भी बात सामने आई है। वहीं वाल्मीकि आश्रम क्षेत्र में लगा साइनबोर्ड टूटे हुए पाए गए हैं। इन घटनाओं के बाद वन विभाग ने पूरे इलाके में निगरानी और चौकसी बढ़ा दी है। वाल्मीकिनगर वनक्षेत्र अधिकारी सत्यम कुमार ने बताया कि नेपाल के चितवन जंगल से हाथियों के आने की सूचना मिलते ही वनकर्मियों की टीम को अलर्ट कर दिया गया है। जंगलों में लगातार विशेष पेट्रोलिंग अभियान चलाया जा रहा है और संभावित स्थानों पर हाथियों के मूवमेंट की निगरानी की जा रही है। उन्होंने बताया कि वन विभाग किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। वन अधिकारियों के अनुसार चितवन जंगल और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का वन क्षेत्र आपस में जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि गैंडे, बाघ, हाथी समेत कई वन्यजीव समय-समय पर नेपाल से वीटीआर क्षेत्र में प्रवेश करते रहते हैं। हर साल भोजन और सुरक्षित वातावरण की तलाश में जंगली हाथियों का झुंड वीटीआर के जंगलों की ओर रुख करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल के जंगलों में लगातार घट रहे ग्रासलैंड और भोजन की कमी के कारण हाथी नदी-नालों को पार कर भारत की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं। वीटीआर के घने जंगल, विस्तृत घासभूमि और शांत वातावरण हाथियों को आकर्षित करते हैं। यही कारण है कि नेपाली हाथियों की आमद अब लगभग हर वर्ष देखने को मिल रही है। सुरक्षा के मद्देनजर वीटीआर में मौजूद चारों प्रशिक्षित हाथियों को अन्यत्र सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है। वनकर्मी लगातार जंगलों में गश्त कर रहे हैं।फिलहाल पूरे इलाके में हाथियों की मौजूदगी को लेकर भय और उत्सुकता दोनों का माहौल बना हुआ है, जबकि वन विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।










