

बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- भारत-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकिनगर के जल संसाधन विभाग के अतिथि भवन में बुधवार को नेपाल, उत्तर प्रदेश और बिहार के अभियंताओं, अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में गंडक परियोजना से जुड़े लंबे समय से लंबित तकनीकी एवं प्रशासनिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से नेपाली क्षेत्र में नहरों और सेवा पथों के आसपास हुए अतिक्रमण को हटाने पर सहमति बनी, जिसे गंडक परियोजना के सुचारू संचालन, सिंचाई व्यवस्था और बाढ़ नियंत्रण के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक की अध्यक्षता कर रहे मुख्य पश्चिमी कैनाल के कार्यपालक अभियंता चंद्रभूषण ने बताया कि गंडक बराज क्षेत्र तथा मुख्य पश्चिमी नहर के आसपास अधिग्रहीत भूमि पर लगातार अवैध कब्जे बढ़ रहे हैं। इससे न केवल नहरों के संचालन और अनुरक्षण कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि जल निकासी अवरुद्ध होने के कारण कृषि भूमि में जलजमाव की समस्या भी गंभीर रूप लेती जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो बिहार और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ नियंत्रण एवं सिंचाई व्यवस्था पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

बैठक में नहरों में निर्धारित जलस्तर एवं डिस्चार्ज बनाए रखने, कटाव निरोधक कार्यों को मजबूत करने, तटबंधों की सुरक्षा, सेवा पथों के अनुरक्षण तथा गादयुक्त जल प्रवाह के नियंत्रण जैसे विषयों पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया। गंडक बराज के कार्यपालक अभियंता मोहम्मद इकबाल अनवर ने कहा कि गंडक परियोजना बिहार के लाखों किसानों की सिंचाई व्यवस्था और बाढ़ सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई है, इसलिए परियोजना से संबंधित सभी बाधाओं को दूर करना अब अत्यंत आवश्यक हो गया है। जानकारी के अनुसार, 30 अप्रैल से 1 मई 2026 तक काठमांडू में आयोजित भारत-नेपाल कोसी एवं गंडक परियोजना की संयुक्त समिति (जेसीकेजीपी) की 11वीं बैठक में भी इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने आपसी सहमति से निर्णय लिया कि गंडक बराज से निकलने वाली पश्चिमी मुख्य नहर, लिंक बांध और तटबंधों के आसपास हुए अतिक्रमण को जल्द हटाया जाएगा। नेपाल सरकार ने भी इस कार्रवाई के लिए अपनी सहमति प्रदान कर दी है। अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत कब्जाधारियों को स्वेच्छा से अपने ढांचे हटाने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है। इसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण हटाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से नहरों में जल प्रवाह सुचारू होगा, सेवा पथों के संचालन में आसानी होगी तथा बाढ़ प्रबंधन व्यवस्था और अधिक मजबूत बन सकेगी। साथ ही किसानों को समय पर सिंचाई जल उपलब्ध कराने में भी सहूलियत मिलेगी। बैठक में बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कई अधिकारी, अभियंता एवं जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें एसआई टीएन चौधरी नवलपरासी, सिंचाई विभाग खंड-2 महाराजगंज के सहायक अभियंता रणजीत सिंह, त्रिवेणी नेपाल पुलिस के सीनियर सब इंस्पेक्टर गगन गिरी, वार्ड अध्यक्ष उमेश कार्की, संपर्क एवं भू-अर्जन पदाधिकारी नेपाल सुबोध कुमार हलवाई, नेपाल गंडक नहर सिंचाई कार्यालय के प्रमुख तिलक मुराथोकी, कनीय अभियंता रविंद्र यादव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और नेपाल के बीच इस प्रकार का समन्वय सीमावर्ती क्षेत्रों में जल संसाधन प्रबंधन को नई दिशा देने के साथ-साथ भविष्य में बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी बनाएगा।










