‘हर घर नल का जल’ बना मजाक, एक महीने से सूखी टोंटियां, पानी के लिए जूझ रहे दलित बस्ती के लोग।

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जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकिनगर पंचायत क्षेत्र के कास्ट भंडार गांव में ‘हर घर नल का जल’ योजना की हकीकत बेहद चिंताजनक रूप में सामने आई है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत हर घर तक पानी पहुंचाने का दावा किया गया था, लेकिन वार्ड संख्या-15 की दलित बस्ती में पिछले एक महीने से नल पूरी तरह सूखे पड़े हैं। जलापूर्ति ठप होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण गोविंद कुमार, सूरज कुमार का कहना है कि गर्मी की शुरुआत होते ही जल संकट और गहरा गया है। नल लगने के बावजूद पानी नहीं आने से लोग दूर-दराज के हैंडपंपों और जल स्रोतों पर निर्भर हो गए हैं। सुबह होते ही पानी भरने के लिए लोगों की कतार लग जाती है, जिससे उनकी दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। विशेष रूप से मजदूर वर्ग की महिलाओं की स्थिति और भी कठिन हो गई है। उन्हें रोजाना मजदूरी पर जाने से पहले घंटों पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है। कई महिलाओं ने बताया कि अगर समय पर पानी नहीं भर पाती हैं तो उन्हें काम पर जाने में देर हो जाती है, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, इस समस्या की मुख्य वजह लो वोल्टेज है, जिसके कारण मोटर सही तरीके से काम नहीं कर पा रही है। हालांकि, इस समस्या की जानकारी संबंधित विभाग को कई बार दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। स्थिति को और गंभीर बनाते हुए गांव के कई हैंडपंप भी जवाब देने लगे हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ही जलस्तर नीचे चला गया है, जिससे वहां भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने पेयजल का संकट गहराता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते जलापूर्ति बहाल नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। हर घर नल का जल’ योजना का उद्देश्य लोगों को घर-घर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था, लेकिन कास्ट भंडार गांव में यह योजना फिलहाल दम तोड़ती नजर आ रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन कब तक इस गंभीर समस्या पर ध्यान देता है और ग्रामीणों को राहत मिलती है।

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