कटाव निरोधी कार्य में मची है लूट, पिपरा ग्राम सभा का अस्तित्व खतरे में।

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बिहार/उत्तरप्रदेश/कुशीनगर। एपी तटबंध पर नरवाजोत के समीप कटाव निरोधी कार्य में लूट मची है।ठेकेदार और जल संसाधन विभाग के अभियंताओ की मनमानी के कारण बांध का अस्तित्व खतरे में है।जिससे तमकुहीराज तहसील के पिपरा ग्राम सभा में बाढ़ जैसी आपदा का खतरा मंडरा रहा है। नरवाजोत में बांध को कटाव से बचाने की झूठी कवायद चल रही है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। जिसका लाभ ठेकेदार भरपूर उठा रहे है बढ़ते जलस्तर के बीच कटाव निरोधी कार्य कराने से काम कम राशि की बंदरबाट ज्यादा हो रही है। नोखलाल सिंह, मनोज सिंह, उपेंद्र सिंह,
बैदनाथ सिंह, अमेरिका सिंह, राम नरेश निषाद, रामनरेश सिंह, प्रदीप सिंह दरहरी सिंह ने बताया कि नरवाजोत के समीप एपी तटबंध पर हो रहे कटाव निरोधी कार्य सोने का अंडा देने वाली मूर्गी की तरह है। यहा काम कम लूट ज्यादा हो रही है। कटाव निरोधी कार्य में बरती गई लापरवाही के कारण गंडक नदी का दबाव बांध पर बढ़ने की प्रबल संभावना है यदि बांध टूटा तो नरवाजोत गांव के अस्तित्व पर संकट तय है, और पिपरा ग्राम सभा को बाढ़ जैसी त्रासदी को झेलना पड़ सकता है, बाढ़ प्रभावित लोग को बांध पर आश्रय लेना पड़ेगा भोजन की संकट से जूझना पड़ सकता है,मेवेशियो के लिए चारा की संकट उत्पन्न हो जायेगी बाढ़ से पिपरा ग्राम सभा में बड़ी तबाही होगी जिसकी चिंता अभियंताओं को नही है।विगत वर्ष स्ट्रीम साइड में बसे लोग कटाव के जद में आ गए थे जो आज भी तटबंध पर आश्रय लिए हुवे।ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग और शासन प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया है और कटाव निरोधी कार्य में लूट के मंशा से हुई गड़बड़ी की उच्च स्तरीय जांच की मांग मांग ग्रामीण कर रहे है।आरोप है की बाढ़ पूर्व तैयारियों और फ्लड फाइटिंग के काम में अभियंताओं के सह से जमकर लूट खसोट की गई है।उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषियों पर करवाई होनी चाहिए।ग्रामीणों का कहना है की काम तब शुरू हुआ,जब नदी का जलस्तर बढ़ने लगा।इसका भरपूर लाभ ठेकेदार उठा रहे है।बिना बेस बनाए बोल्डर पीचिंग कर दी गई जो मामूली जलस्तर के वृद्धि के साथ ही टूट कर नदी में विलीन हो गए है। जल संसाधान विभाग के अभियंताओं ने ठेकेदारों को लूट करने की छूट दे रखी है,कटाव निरोधी कार्य की जांच कर कार्य में गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई करने की मांग की है।उक्त ग्रामीणों ने कहा कि मामले की जांच नहीं हुई तो वे धरना पर बैठेंगे और आंदोलन करेंगे।

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