गंडक नदी में गूंज रही नई जिंदगी की आहट, बढ़ेगा घड़ियालों का कुनबा

0
50

Spread the love

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे गंडक नदी क्षेत्र में मिले पांच घोंसले, सौ अधिक अंडों से बढ़ी उम्मीदें, संरक्षण प्रयासों से लौट रही संकटग्रस्त प्रजाति की मुस्कान।

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर : भारत-नेपाल सीमा से सटे वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) क्षेत्र में बहने वाली गंडक नदी इन दिनों घड़ियाल संरक्षण की एक प्रेरणादायक कहानी लिख रही है। कभी अस्तित्व के संकट से जूझ रही घड़ियाल प्रजाति अब धीरे-धीरे अपने प्राकृतिक आवास में फिर से मजबूती से लौटती दिखाई दे रही है। इस वर्ष नदी के रेतीले तटों पर मादा घड़ियालों द्वारा बड़ी संख्या में घोंसले बनाकर अंडे दिए गए हैं, जिससे आने वाले वर्षों में इनकी आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद जगी है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान प्रजनन सत्र में अब तक गंडक नदी में कुल पांच घड़ियाल घोंसलों की पहचान की जा चुकी है। एक मादा घड़ियाल सामान्यतः 30 से अधिक अंडे देती है। ऐसे में इन पांच घोंसलों में सैकड़ों अंडों के सुरक्षित होने का अनुमान है। अंडों और नवजात शावकों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की विशेष टीम लगातार निगरानी कर रही है।

संवेदनशील क्षेत्रों में पर्यटकों और आम लोगों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि घोंसलों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। हाल ही में संरक्षण अभियान को बड़ी सफलता तब मिली जब बगहा रेंज के रतवल पुल के समीप स्थित एक घोंसले से 31 घड़ियाल शावकों का सफल उद्भवन हुआ। बिहार वन विभाग एवं वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) की संयुक्त देखरेख में इन शावकों को सुरक्षित रूप से गंडक नदी में छोड़ा गया। यह उपलब्धि वैज्ञानिक संरक्षण, नियमित निगरानी और समर्पित प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मानी जा रही है।
वन अधिकारियों के अनुसार, अप्रैल और मई माह में किए गए संयुक्त सर्वेक्षण के दौरान इस घोंसले की पहचान हुई थी। इसके बाद घोंसले की सुरक्षा, निगरानी और संरक्षण के लिए विशेष व्यवस्था की गई, जिसके कारण स्वस्थ शावकों का सफल उद्भवन संभव हो सका। विशेषज्ञों का मानना है कि घोंसलों की बढ़ती संख्या गंडक नदी के बेहतर पारिस्थितिक स्वास्थ्य और संरक्षण कार्यक्रमों की सफलता का स्पष्ट संकेत है।


गौरतलब है कि गंडक नदी को चंबल के बाद देश में घड़ियालों का दूसरा सबसे बड़ा प्राकृतिक आवास माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने घड़ियाल को अपनी रेड लिस्ट में “अत्यंत संकटग्रस्त” श्रेणी में रखा है। वीटीआर के सीएफ गौरव ओझा ने कहा कि यदि वर्तमान संरक्षण प्रयास इसी तरह जारी रहे तो गंडक नदी आने वाले समय में घड़ियाल संरक्षण की राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक मिसाल बन सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here